🙏 मकर संक्रांति घुगुतिया की शुभकामनाएं 🙏



फूलदेईक छापड़, खतडुवा क काकड़

घुतिक भाव, उतरेनिक काव

बसंत पंचमिक जौं, सोनोक हर्याव

बगवाइक च्यूड़, चौतोक आव

त्यारोक घ्यूं, आब कि कू ?


कुमाऊं के लोकपर्वों की दुनियाभर में अपनी एक अलग पहचान है। घुघुतिया त्योहार (मकर संक्रांति) भी उनमें से एक है। सदियों से लोग घुघुतिया त्यार धूमधाम से मनाते आ रहे हैं।


परंपरा के अनुसार सरयू नदी के इस पार वाले कत्यूरघाटी के लोग माघ के पहले दिन मनाते हैं यह त्योहार- नदी के उस पार गंगोली, बड़ाऊ, कमश्यार घाटी के लोग पौष माह के अंतिम दिन मनाते हैं पर्वकुमाऊं में इसे दो अलग-अलग दिन मनाया जाता है। यहां सरयू नदी इसकी सीमा रेखा मानी जाती है। कहा जाता है कि सरयू नदी के इस पार के लोग माघ माह के पहले दिन यह पर्व मनाते हैं। जबकि नदी के उस पार के लोग इसे पौष माह के अंतिम दिन मनाते हैं और माघ माह के पहले दिन घुघुते उड़ाते हैं। सरयू नदी के इस पार तल्ला-मल्ला कत्यूरघाटी और बिचवा कत्यूरघाटी को अल्मोड़ा और बागेश्वर नाम से जाना जाता है। यहां घुघुतिया त्योहार माघ माह के पहले दिन शुक्रवार को मनाया जाएगा। सुबह नहाने-धोने पूजा पाठ के बाद दिन के समय में लोग अपने घरों में दूध, गुड़-चीनी, घी और आटे को मिलाकर घुघुते तैयार करेंगे। यहां शनिवार को घुघुते उड़ाए जाएंगे। वहीं सरयू नदी के उस पार गंगोली, बड़ाऊं, कमश्यार घाटी जिसे गंगोलीहाट, पिथौरागढ़, चम्पावत के नाम से भी जाना जाता है। वहां लोग मशांत यानी पौष माह के अंतिम दिन घुघुते बनाते हैं। जिसे माघ माह के पहले दिन उड़ाया जाता है। यह परम्परा सदियों से चला आ रहा है। सरयू नदी के इस पार और उस पार की घुघुतिया त्यार को लेकर विभिन्न कहानियां हैं।


कुमाऊं के लोग घुघुतिया त्योहार को विभिन्न पकवानों को बनाकर पर्व को मनाते हैं। घुघुते, खजूरे बनाने के साथ कुमाऊं के लोग कौवे के लिए भी रोटी बनाते हैं। जिसे माघ माह के पहले दिन कौवे को बुलाकर उसे खिलाया जाता है। इसका उत्साह बच्चों में देखने से ही बनता है। घुघुते की माला बनाने का इंतजार हर बच्चे को है।

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